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दिल्ली में IVF उपचार: प्रक्रिया, सफलता दर और खर्च

August 3, 2026
5 min read

यदि प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं हो रहा है, तो IVF एक प्रभावी उपचार विकल्प हो सकता है। इसमें अंडाणु और शुक्राणु को लैब में निषेचित कर भ्रूण बनाया जाता है और गर्भाशय में स्थापित किया जाता है। सही जांच, व्यक्तिगत उपचार योजना, स्वस्थ जीवनशैली और अनुभवी फर्टिलिटी विशेषज्ञ IVF की सफलता की संभावना बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आईवीएफ (IVF) क्या है?

आईवीएफ एक उन्नत प्रजनन तकनीक है जिसमें अंडाणु और शुक्राणु को शरीर के बाहर प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है। यह उन दंपतियों के लिए वरदान है जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में असमर्थ हैं।

आईवीएफ (In Vitro Fertilization) एक सहायक प्रजनन तकनीक (ART) है जिसमें महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को शरीर के बाहर, प्रयोगशाला में निषेचित किया जाता है। इस प्रक्रिया में बने भ्रूण को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है, जहाँ वह सामान्य गर्भावस्था की तरह विकसित होता है।

यह लेख उन दंपतियों के लिए है जो बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं और IVF की प्रक्रिया, सफलता दर, जोखिम तथा दिल्ली NCR में इसके खर्च को समझना चाहते हैं। इसमें सरोगेसी, IUI या अन्य ART तकनीकों की तुलना शामिल नहीं है।
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आईवीएफ की आवश्यकता कब पड़ती है?

यदि कोई दंपति 12 महीने की नियमित कोशिश के बाद भी गर्भधारण नहीं कर पाता तो IVF पर विचार किया जाता है। 35 वर्ष से अधिक उम्र में यह सीमा घटकर 6 महीने हो जाती है।

IVF तब सुझाया जाता है जब प्राकृतिक गर्भधारण संभव न हो। इसके पीछे कई चिकित्सकीय कारण हो सकते हैं जो महिला, पुरुष या दोनों को प्रभावित करते हैं।

किन लोगों को IVF करवाना चाहिए?

IVF हर दंपति के लिए नहीं होता। सही निदान के बाद ही विशेषज्ञ यह तय करते हैं कि IVF उचित विकल्प है या नहीं। नीचे दी गई स्थितियाँ IVF की आवश्यकता को स्पष्ट करती हैं।

स्थिति किसे प्रभावित करती है
फैलोपियन ट्यूब बंद या क्षतिग्रस्त महिला
एंडोमेट्रियोसिस महिला
ओवुलेशन विकार (PCOS सहित) महिला
कम शुक्राणु संख्या या गतिशीलता पुरुष
अस्पष्ट बांझपन दोनों
आनुवंशिक रोग (PGT के साथ) दोनों
बार-बार गर्भपात महिला
IUI की 3 या अधिक बार असफलता दोनों

IVF शुरू करने से पहले कौन-कौन सी जांच होती हैं?

IVF साइकल शुरू होने से पहले दंपति की विस्तृत जांच की जाती है। यह जांच उपचार की दिशा तय करती है और अनावश्यक प्रयासों से बचाती है। सही निदान ही सफल IVF की नींव है।

महिला के लिए: AMH (ओवेरियन रिजर्व), AFC अल्ट्रासाउंड, TSH, Prolactin, Fasting Insulin, हिस्टेरोस्कोपी और HIV, Hepatitis B/C, रूबेला IgG।

पुरुष के लिए: सीमेन एनालिसिस, DNA Fragmentation Index (पिछला IVF असफल रहने पर), और हार्मोन पैनल जिसमें FSH, LH तथा Testosterone शामिल हैं।

IVF कैसे किया जाता है? (स्टेप बाय स्टेप प्रक्रिया)

IVF एक बहु-चरणीय प्रक्रिया है जो लगभग 3 से 6 सप्ताह में पूरी होती है। हर चरण वैज्ञानिक रूप से नियंत्रित होता है और प्रत्येक की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

  • चरण 1: ओवेरियन स्टिमुलेशन (8 से 14 दिन) – महिला को हार्मोन इंजेक्शन (Gonadotropins) दिए जाते हैं ताकि एक साथ कई अंडाणु विकसित हों। सामान्य चक्र में केवल 1 अंडाणु बनता है, जबकि IVF में 8 से 15 अंडाणु प्राप्त करने का लक्ष्य होता है।
  • चरण 2: फॉलिकल मॉनिटरिंग
  • स्टिमुलेशन के दौरान हर 2 से 3 दिन पर ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड और एस्ट्राडियोल ब्लड टेस्ट से फॉलिकल की वृद्धि मॉनिटर की जाती है।
  • चरण 3: ट्रिगर इंजेक्शन
  • जब फॉलिकल 18 से 20mm आकार के हो जाते हैं, तब hCG या GnRH Agonist का ट्रिगर इंजेक्शन दिया जाता है। एग रिट्रीवल ठीक 36 घंटे बाद की जाती है।
  • चरण 4: एग रिट्रीवल (OPU)
  • यह एक छोटी सर्जिकल प्रक्रिया है जो बेहोशी (sedation) में की जाती है। अल्ट्रासाउंड गाइडेंस से एक पतली सुई द्वारा अंडाशय से अंडाणु निकाले जाते हैं। इसमें लगभग 20 से 30 मिनट लगते हैं।
  • चरण 5: लैब में निषेचन
  • IVF में अंडाणु और शुक्राणु को एक पेट्री डिश में रखा जाता है। ICSI में एक विशेष माइक्रोनीडल से सीधे अंडाणु में एक शुक्राणु इंजेक्ट किया जाता है — यह पुरुष बांझपन में अधिक प्रभावी है।
  • चरण 6: एम्ब्रियो कल्चर (3 से 5 दिन)
  • भ्रूण को इनक्यूबेटर में विकसित किया जाता है। Day 5 Blastocyst चरण के भ्रूण की सफलता दर Day 3 भ्रूण से 10 से 15 प्रतिशत अधिक होती है।
  • चरण 7: एम्ब्रियो ट्रांसफर
  • एक पतली कैथेटर के माध्यम से 1 से 2 भ्रूण गर्भाशय में स्थानांतरित किए जाते हैं। यह प्रक्रिया दर्दरहित होती है और इसमें केवल 10 से 15 मिनट लगते हैं। ट्रांसफर के बाद 2 सप्ताह तक Progesterone सपोर्ट दिया जाता है।
  • चरण 8: प्रेग्नेंसी टेस्ट (Beta hCG)
  • एम्ब्रियो ट्रांसफर के 14 दिन बाद खून में Beta hCG लेवल की जांच की जाती है। यदि hCG पॉजिटिव आए तो इसे क्लीनिकल प्रेग्नेंसी माना जाता है।

IVF प्रक्रिया में कितना समय लगता है?

शुरुआती जांच से लेकर प्रेग्नेंसी टेस्ट तक एक पूरा IVF साइकल 3 से 6 सप्ताह में पूरा होता है। कुछ मामलों में फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय लग सकता है।

IVF की सफलता दर किन बातों पर निर्भर करती है?

IVF की सफलता कोई एक कारक नहीं, बल्कि कई जैविक और क्लीनिकल कारकों का संयोजन है। सबसे प्रमुख कारक महिला की आयु है, जो अंडाणु की गुणवत्ता और ओवेरियन रिजर्व दोनों को सीधे प्रभावित करती है।

आयु प्रति साइकल सफलता दर (अनुमानित)
35 वर्ष से कम 40 से 65 प्रतिशत
35 से 37 वर्ष 35 से 45 प्रतिशत
38 से 40 वर्ष 25 से 35 प्रतिशत
40 से 42 वर्ष 15 से 25 प्रतिशत
42 वर्ष से अधिक 5 से 15 प्रतिशत

स्रोत: ASRM 2023 Guidelines एवं ICMR-पंजीकृत क्लीनिक डेटा

अन्य महत्वपूर्ण कारकों में अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता, Blastocyst बनाम Day 3 ट्रांसफर, एम्ब्रियोलॉजी लैब की तकनीक, एंडोमेट्रियल रिसेप्टिविटी (ERA टेस्ट) और BMI शामिल हैं।

MediWorld Fertility में 35 वर्ष से कम आयु की महिलाओं में Blastocyst ट्रांसफर की सफलता दर 55 से 60 प्रतिशत रही है।

IVF के फायदे

IVF केवल गर्भधारण का रास्ता नहीं है यह एक ऐसी तकनीक है जो बंद ट्यूब, पुरुष बांझपन और आनुवंशिक रोगों जैसी जटिल स्थितियों में भी माता-पिता बनने का विकल्प देती है।

बंद फैलोपियन ट्यूब में भी गर्भधारण संभव है। PGT-A तकनीक द्वारा आनुवंशिक रूप से स्वस्थ भ्रूण का चयन किया जा सकता है। अतिरिक्त भ्रूण को Vitrification तकनीक से फ्रीज करके भविष्य में उपयोग किया जा सकता है। पुरुष बांझपन में ICSI से प्रभावी समाधान मिलता है। बार-बार गर्भपात की स्थिति में PGT के साथ IVF एक सुरक्षित विकल्प है।

IVF के संभावित जोखिम और दुष्प्रभाव

IVF एक सुरक्षित प्रक्रिया है, लेकिन हर चिकित्सा प्रक्रिया की तरह इसके भी कुछ संभावित जोखिम हैं। इनकी पूर्व जानकारी दंपति को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रखती है।

OHSS (Ovarian Hyperstimulation Syndrome) 1 से 2 प्रतिशत मामलों में गंभीर रूप लेता है, जिसमें पेट फूलना, दर्द और मतली होती है। GnRH Antagonist प्रोटोकॉल से इस जोखिम को काफी कम किया जाता है।

एकाधिक भ्रूण ट्रांसफर से जुड़वाँ गर्भावस्था की संभावना बनती है। Single Embryo Transfer (SET) नीति से इसे नियंत्रित किया जाता है। एग रिट्रीवल से जुड़े संक्रमण या रक्तस्राव के मामले अत्यंत दुर्लभ हैं — 0.1 प्रतिशत से भी कम। भावनात्मक तनाव की स्थिति में MediWorld Fertility में काउंसलिंग सहायता उपलब्ध है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। IVF उपचार से पहले अपने फर्टिलिटी विशेषज्ञ से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें।

भारत में IVF का खर्च कितना है?

दिल्ली NCR में एक IVF साइकल का खर्च सामान्यतः 1 लाख 70+ हजार से 2 लाख 70+ हजार रुपये के बीच होता है। यह राशि प्रक्रिया के प्रकार, दवाइयों और अतिरिक्त तकनीकों के अनुसार बदलती है।

खर्च का प्रकार अनुमानित राशि (दिल्ली NCR)
बेसिक IVF साइकल 1,20,000 से 1,80,000+ रुपये
ICSI के साथ IVF 1,50,000 से 2,20,000+ रुपये
Blastocyst कल्चर अतिरिक्त 10,000 से 20,000+ रुपये
PGT-A आनुवंशिक जांच अतिरिक्त 40,000 से 80,000+ रुपये
एम्ब्रियो फ्रीजिंग अतिरिक्त 15,000 से 25,000+ रुपये
ERA टेस्ट अतिरिक्त 35,000 से 40,000+ रुपये
दवाइयाँ 30,000 से 80,000+ रुपये

IVF से पहले की तैयारी

सही तैयारी IVF की सफलता की संभावना को बढ़ाती है। शारीरिक, मानसिक और जीवनशैली संबंधी बदलाव उपचार शुरू होने से कम से कम तीन महीने पहले शुरू करने चाहिए।

साइकल से 3 महीने पहले फोलिक एसिड (400 से 800 mcg प्रतिदिन) शुरू करें। धूम्रपान और शराब पूरी तरह बंद करें। BMI 18.5 से 24.9 के बीच रखना IVF सफलता को बेहतर करता है। पुरुष एग रिट्रीवल से 3 से 5 दिन पहले संयम (abstinence) रखें। डॉक्टर को सभी चल रही दवाओं की जानकारी अवश्य दें।

IVF के बाद क्या करें?

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद का समय भावनात्मक और शारीरिक दोनों दृष्टि से संवेदनशील होता है। सही आदतें और डॉक्टर के निर्देशों का पालन इस अवधि में सबसे जरूरी है।

हल्की दैनिक गतिविधियाँ जारी रख सकती हैं लेकिन भारी वजन और तीव्र व्यायाम से बचें। Progesterone suppositories या इंजेक्शन डॉक्टर के निर्देशानुसार लें। कोई भी लक्षण जैसे स्पॉटिंग या ऐंठन तुरंत डॉक्टर को बताएं। Beta hCG टेस्ट से पहले होम प्रेग्नेंसी टेस्ट न करें क्योंकि इससे गलत परिणाम आ सकते हैं।

IVF के दौरान क्या खाएं और किन चीजों से बचें?

आहार IVF की सफलता को प्रत्यक्ष रूप से तो नहीं बदलता, लेकिन अंडाणु की गुणवत्ता, एंडोमेट्रियल स्वास्थ्य और हार्मोनल संतुलन पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

खाएं: पत्तेदार सब्जियाँ, दालें और दही (प्रोटीन और फोलेट के लिए), अखरोट और अलसी (Omega-3 के लिए), अनार और बेरी (एंटीऑक्सीडेंट के लिए) और प्रतिदिन 2 से 3 लीटर पानी।

बचें: प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट, 200mg से अधिक कैफीन प्रतिदिन, कच्चा मांस और अधपका अंडा तथा अत्यधिक मीठा और मैदा।

IVF कब सफल माना जाता है?

IVF की सफलता केवल पॉजिटिव प्रेग्नेंसी टेस्ट नहीं है। इसे तीन चरणों में मापा जाता है और Live Birth Rate को सबसे विश्वसनीय मापदंड माना जाता है।

क्लीनिकल प्रेग्नेंसी तब मानी जाती है जब Beta hCG पॉजिटिव हो और 6 से 7 सप्ताह में अल्ट्रासाउंड में हार्टबीट दिखे। ऑनगोइंग प्रेग्नेंसी तब होती है जब गर्भावस्था 12 सप्ताह के बाद जारी रहे। Live Birth Rate — अर्थात स्वस्थ शिशु का जन्म — यही वास्तविक सफलता का प्रमाण है। क्लीनिक चुनते समय Pregnancy Rate नहीं, Live Birth Rate पूछें।

MediWorld Fertility को IVF के लिए क्यों चुनें?

IVF की सफलता केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि सही विशेषज्ञ, अनुभवी एम्ब्रियोलॉजी लैब और व्यक्तिगत उपचार योजना पर निर्भर करती है। MediWorld Fertility में हर दंपति की मेडिकल स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन कर उनके लिए व्यक्तिगत IVF उपचार योजना तैयार की जाती है, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त करने में सहायता मिलती है।

  • डॉ. नेहा गुप्ता – 20+ वर्षों का अनुभव रखने वाली वरिष्ठ फर्टिलिटी विशेषज्ञ, जिन्होंने हजारों IVF एवं ICSI उपचारों का सफलतापूर्वक मार्गदर्शन किया है।
  • आधुनिक IVF लैब और उन्नत एम्ब्रियो कल्चर तकनीक
  • ICMR दिशानिर्देशों के अनुसार वैज्ञानिक एवं सुरक्षित उपचार प्रोटोकॉल
  • प्रत्येक दंपति के लिए व्यक्तिगत (Personalized) उपचार योजना
  • अनुभवी एम्ब्रियोलॉजिस्ट और समर्पित फर्टिलिटी केयर टीम
  • पारदर्शी पैकेज, बिना छिपे हुए शुल्क और EMI सुविधा
  • उपचार के हर चरण में काउंसलिंग, भावनात्मक सहयोग और निरंतर फॉलो-अप
  • दिल्ली NCR में विश्वसनीय फर्टिलिटी सेंटर, जहाँ रोगी-केंद्रित देखभाल को प्राथमिकता दी जाती है

डॉ. नेहा गुप्ता और MediWorld Fertility की अनुभवी टीम आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और व्यक्तिगत देखभाल के साथ आपके माता-पिता बनने के सफर में हर कदम पर आपके साथ है।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

कुछ स्थितियाँ ऐसी होती हैं जिनमें तुरंत विशेषज्ञ से मिलना जरूरी होता है। देरी करने से उपचार की सफलता दर पर असर पड़ सकता है। MediWorld Fertility में तत्काल परामर्श उपलब्ध है।

एग रिट्रीवल के बाद तेज पेट दर्द या सूजन (OHSS के संकेत), ट्रांसफर के बाद भारी रक्तस्राव, 38 डिग्री सेल्सियस से अधिक बुखार, 12 महीने की कोशिश के बाद गर्भधारण न होना और AMH रिपोर्ट में 1.0 ng/mL से कम स्तर – इन सभी स्थितियों में तुरंत संपर्क करें।

निष्कर्ष

IVF आज उन दंपतियों के लिए एक विश्वसनीय और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध विकल्प है जो प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं कर पा रहे। सही क्लीनिक, अनुभवी एम्ब्रियोलॉजिस्ट, उन्नत लैब तकनीक और व्यक्तिगत उपचार योजना – ये चार कारक IVF की सफलता को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं।

MediWorld Fertility, Delhi NCR में ICMR-अनुमोदित प्रोटोकॉल, Time-Lapse Incubation तकनीक और हर दंपति के लिए व्यक्तिगत उपचार योजना के साथ आपकी माता-पिता बनने की यात्रा में साथ हैं।

Frequently Asked Questions

क्या IVF में दर्द होता है? expand_more

एग रिट्रीवल बेहोशी में होती है इसलिए दर्द नहीं होता। स्टिमुलेशन के दौरान हल्की असुविधा या पेट में भारीपन हो सकता है।

IVF के कितने साइकल करवाने चाहिए? expand_more

3 साइकल तक की सलाह दी जाती है। 35 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में 3 साइकल की cumulative सफलता दर 60 से 80 प्रतिशत तक होती है।

IVF से जुड़वाँ बच्चों का जोखिम कितना है? expand_more

Single Embryo Transfer (SET) से यह जोखिम 5 प्रतिशत से कम हो जाता है। MediWorld Fertility SET को प्राथमिकता देता है।

क्या IVF शिशु सामान्य होते हैं? expand_more

हाँ। दशकों के वैश्विक शोध में IVF से जन्मे बच्चों का स्वास्थ्य, विकास और बुद्धि स्तर सामान्य गर्भावस्था से जन्मे बच्चों के समान पाया गया है।

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This content is reviewed by

Dr. Neha Gupta

Clinical Director & Sr. Consultant (Infertility Specialist)

Dr. Neha Gupta is an experienced fertility specialist, IVF expert, and senior gynecologist with 21+ years in reproductive medicine. She has successfully treated 2000+ couples using advanced IVF, ICSI, IUI, donor programs, and fertility preservation techniques.

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